मणिपाल, 25 जून 2026। बच्चों में जटिल रक्त रोगों और कैंसर के उपचार को नई दिशा देने की दिशा में कस्तूरबा अस्पताल, मणिपाल ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अस्पताल में पेडियाट्रिक बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन, सेल्युलर थेरेपी, हेमेटोलॉजी एवं इम्यूनोलॉजी (BHIM) डिवीजन का शुभारंभ किया गया। इस नई इकाई का उद्देश्य ऐसे बच्चों को एक ही स्थान पर विशेषज्ञ और समग्र उपचार उपलब्ध कराना है, जिन्हें बोन मैरो ट्रांसप्लांट या अत्याधुनिक सेल्युलर थेरेपी की आवश्यकता होती है।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार यह डिवीजन उन बच्चों के इलाज पर विशेष रूप से केंद्रित रहेगा जो रक्त संबंधी गंभीर बीमारियों, जन्मजात प्रतिरक्षा विकारों तथा बाल्यावस्था के कैंसर जैसी जटिल समस्याओं से जूझ रहे हैं। नई सुविधा के माध्यम से मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकों की बहु-विषयक टीम, आधुनिक तकनीक और लंबे समय तक फॉलो-अप देखभाल एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जाएगी।
इस अवसर पर विशेषज्ञों ने कहा कि बच्चों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट केवल उपचार नहीं, बल्कि कई मामलों में जीवन बचाने वाला विकल्प साबित होता है। नई इकाई से न केवल कर्नाटक बल्कि आसपास के राज्यों के मरीजों को भी उन्नत चिकित्सा सेवाओं का लाभ मिलने की उम्मीद है।
डिवीजन का उद्घाटन विश्व सिकल सेल जागरूकता दिवस के अवसर पर किया गया। विशेषज्ञों ने इस मौके पर सिकल सेल रोग और अन्य आनुवंशिक रक्त विकारों की समय पर पहचान, उपचार और जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
अस्पताल का मानना है कि नई BHIM इकाई क्षेत्रीय रेफरल सेंटर के रूप में विकसित होगी और बच्चों के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट, इम्यूनोलॉजी तथा सेल्युलर थेरेपी जैसी उन्नत सेवाओं तक पहुंच को और बेहतर बनाएगी।
BHIM डिवीजन से क्या होगा लाभ?
- जटिल रक्त रोगों से पीड़ित बच्चों को विशेषज्ञ उपचार।
- बोन मैरो ट्रांसप्लांट और सेल्युलर थेरेपी की उन्नत सुविधा।
- जन्मजात प्रतिरक्षा विकारों के इलाज के लिए विशेष चिकित्सा।
- कैंसर से जूझ रहे बच्चों के लिए समन्वित (Multidisciplinary) देखभाल।
- दीर्घकालिक फॉलो-अप और आधुनिक उपचार व्यवस्था।
नोट: यह समाचार स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। किसी भी बीमारी या उपचार से जुड़ा निर्णय लेने से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।





