नई दिल्ली | 04 सितंबर 2026
दिल्ली के VMMC और सफदरजंग अस्पताल में जटिल यूरोलॉजिकल बीमारियों की पहचान को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल की गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने अस्पताल में Centre for Advanced Bladder Diagnostics का उद्घाटन किया। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, यह भारत में पहली ऐसी सुविधा है जहां Video Urodynamics (VUDS) को Near Infrared Spectroscopy (NIRS) आधारित ब्रेन मैपिंग के साथ जोड़ा गया है।
ब्लैडर के साथ दिमाग की प्रतिक्रिया भी होगी दर्ज
नई तकनीक में मरीज के ब्लैडर के भरने और खाली होने के दौरान उसकी कार्यप्रणाली की जांच की जाएगी। साथ ही NIRS तकनीक के माध्यम से उस समय मस्तिष्क में होने वाले रक्त-ऑक्सीजन संबंधी बदलावों को भी देखा जा सकेगा।
इससे डॉक्टरों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि पेशाब से जुड़ी समस्या मुख्य रूप से ब्लैडर से संबंधित है, न्यूरोलॉजिकल कारणों से है या दोनों का संयोजन है।
हर साल करीब 5,000 मरीजों को लाभ
अस्पताल के अनुसार नया सेंटर सालाना लगभग 5,000 मरीजों को विशेषज्ञ जांच की सुविधा उपलब्ध करा सकता है। खास तौर पर ऐसे मरीजों के लिए यह उपयोगी हो सकता है जिनमें बार-बार पेशाब आना, पेशाब रोकने में परेशानी, पेशाब का रिसाव या ब्लैडर पूरी तरह खाली न होने जैसी समस्याओं का कारण सामान्य जांच से स्पष्ट नहीं हो पाता।
PET-CT और SPECT-CT भी शुरू
इसी कार्यक्रम के दौरान अस्पताल के न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग में PET-CT और SPECT-CT सुविधाओं का भी उद्घाटन किया गया।
PET-CT का उपयोग विशेष रूप से कैंसर की पहचान, बीमारी की स्टेजिंग और उपचार के प्रभाव का आकलन करने में किया जा सकता है। वहीं SPECT-CT से हृदय, किडनी, एंडोक्राइन, हड्डियों और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल से जुड़ी कुछ स्थितियों की जांच में मदद मिलेगी।
सरकारी अस्पताल में उन्नत जांच की सुविधा
इन सुविधाओं का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि सफदरजंग अस्पताल एक प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थान है। मंत्रालय के अनुसार, नई न्यूक्लियर मेडिसिन सुविधाओं से लगभग 600–700 मरीजों को सालाना लाभ मिलने की उम्मीद है और इन्हें किफायती लागत पर उपलब्ध कराया जाएगा।
मेडिकल शिक्षा में भी मिलेगी मदद
नया ब्लैडर डायग्नोस्टिक्स सेंटर मरीजों के इलाज के साथ-साथ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन और प्रशिक्षण में भी उपयोग किया जाएगा। इससे मेडिकल छात्रों और विशेषज्ञ डॉक्टरों को आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव मिल सकेगा।
अस्वीकरण: यह खबर जन-जागरूकता के उद्देश्य से है। किसी भी जांच या उपचार की आवश्यकता का निर्णय योग्य चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही किया जाना चाहिए।
स्रोत: PTI / Outlook India / ETHealthworld, प्रकाशित 04 सितंबर 2026।





