नई डिजिटल व्यवस्था से अस्पतालों, डॉक्टरों और फार्मेसी को दवाओं की प्रमाणित जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध होगी।
नई दिल्ली | 01 जुलाई 2026
भारत ने डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने National Drug Registry (राष्ट्रीय ड्रग रजिस्ट्री) की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य देश में उपलब्ध दवाओं की जानकारी को एकीकृत, प्रमाणित और मानकीकृत (Standardized) रूप में उपलब्ध कराना है। यह पहल आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत विकसित की गई है।
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक दवा को एक मानकीकृत डिजिटल पहचान (Digital Identity) दी जाएगी। इससे अस्पतालों, डॉक्टरों, फार्मेसी, डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों को दवाओं की एक जैसी और प्रमाणित जानकारी उपलब्ध होगी। सरकार का मानना है कि इससे दवाओं के अलग-अलग नामों और रिकॉर्ड में होने वाली भ्रम की स्थिति को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
फिलहाल इस रजिस्ट्री में 1.23 लाख से अधिक ब्रांडेड दवाएं, 10 हजार से अधिक जेनेरिक दवाएं और 29 हजार से अधिक औषधीय पदार्थ (Substances) शामिल किए गए हैं। उपयोगकर्ता दवा को उसके जेनेरिक नाम, ब्रांड नाम, निर्माता या औषधीय पदार्थ के आधार पर खोज सकेंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस पहल से ई-प्रिस्क्रिप्शन, डिजिटल मेडिकल रिकॉर्ड, दवा आपूर्ति प्रणाली और रोगी सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। साथ ही विभिन्न अस्पतालों और स्वास्थ्य प्रणालियों के बीच दवा संबंधी जानकारी का आदान-प्रदान अधिक आसान और सटीक हो सकेगा।
मुख्य बातें
- दवाओं के लिए राष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल रजिस्ट्री शुरू।
- प्रत्येक दवा को मिलेगी मानकीकृत डिजिटल पहचान।
- 1.23 लाख से अधिक ब्रांडेड और 10 हजार से अधिक जेनेरिक दवाएं शामिल।
- डॉक्टरों, अस्पतालों और फार्मेसी को मिलेगा एकीकृत एवं प्रमाणित डाटा।
- डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं और मरीजों की सुरक्षा को मिलेगा बढ़ावा।
अस्वीकरण
यह समाचार उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी निर्णय या दवा के उपयोग के लिए योग्य चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।





