स्वास्थ्य मंत्रालय ने दवा आयात से जुड़े नियमों में संशोधन का मसौदा जारी किया, हितधारकों से मांगे सुझाव।
नई दिल्ली | 26 जून 2026
देश में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने आयातित दवाओं से जुड़े नियमों में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। प्रस्तावित बदलाव के अनुसार, भारत में आयात होने वाली दवाओं के पास आयात के समय कम से कम 12 महीने की शेष शेल्फ लाइफ होना आवश्यक होगा। इस मसौदे पर सार्वजनिक सुझाव आमंत्रित किए गए हैं।
वर्तमान व्यवस्था में आयातित दवाओं के लिए कुल शेल्फ लाइफ का एक निश्चित प्रतिशत शेष होना अनिवार्य है। नए प्रस्ताव का उद्देश्य इस प्रक्रिया को अधिक व्यावहारिक बनाना है, ताकि मरीजों तक पर्याप्त उपयोग अवधि वाली दवाएं समय पर पहुंच सकें और आपूर्ति व्यवस्था अधिक प्रभावी बन सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो दवाओं के भंडारण, वितरण और उपयोग की प्रक्रिया में आसानी होगी। साथ ही अस्पतालों और दवा विक्रेताओं के पास दवाओं के सुरक्षित उपयोग के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध रहेगा, जिससे अनावश्यक बर्बादी में भी कमी आ सकती है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह प्रस्ताव केवल आयातित दवाओं की शेष शेल्फ लाइफ से संबंधित है। दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता से जुड़े मौजूदा मानकों में किसी प्रकार का बदलाव प्रस्तावित नहीं किया गया है। कुछ विशेष श्रेणी की दवाओं, जैसे जैविक उत्पाद (Biologicals) और रेडियोफार्मास्यूटिकल्स, के लिए अलग प्रावधान यथावत रहेंगे।
मंत्रालय ने दवा उद्योग, चिकित्सा विशेषज्ञों और आम नागरिकों से निर्धारित अवधि के भीतर सुझाव और आपत्तियां भेजने का अनुरोध किया है। प्राप्त सुझावों की समीक्षा के बाद अंतिम नियम जारी किए जाएंगे।
अस्वीकरण
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