नई दिल्ली। दुनिया भर में बढ़ते मोटापे, मधुमेह और हृदय रोगों के बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चीनी (Sugar) के सेवन को लेकर और सख्त रुख अपनाया है। वर्ष 2026 में जारी विभिन्न स्वास्थ्य दिशानिर्देशों और विशेषज्ञ सिफारिशों में लोगों को अतिरिक्त चीनी (Added Sugar) का सेवन कम से कम करने की सलाह दी गई है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार वयस्कों और बच्चों को अपनी कुल दैनिक कैलोरी का 10 प्रतिशत से कम हिस्सा ही फ्री शुगर से लेना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसे 5 प्रतिशत से भी कम रखा जाए तो स्वास्थ्य को अतिरिक्त लाभ मिल सकते हैं। इसका अर्थ है कि एक सामान्य व्यक्ति को प्रतिदिन लगभग 25 ग्राम (करीब 6 चम्मच) से अधिक अतिरिक्त चीनी नहीं लेनी चाहिए।
हाल में प्रकाशित स्वास्थ्य रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि “कोई भी मात्रा में अतिरिक्त चीनी स्वास्थ्य के लिए आवश्यक नहीं है।” नए आहार दिशानिर्देशों में बच्चों और किशोरों के लिए मीठे पेय पदार्थ, पैकेज्ड जूस, कैंडी, चॉकलेट और अधिक चीनी वाले स्नैक्स से दूरी बनाने की सलाह दी गई है।
क्यों बढ़ी चिंता?
विशेषज्ञों के अनुसार अधिक चीनी का सेवन कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है, जिनमें शामिल हैं:
– टाइप-2 डायबिटीज
– मोटापा
– हृदय रोग
– फैटी लिवर
– दांतों की सड़न
– उच्च रक्तचाप
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश लोग केवल चाय-कॉफी में डाली गई चीनी से ही नहीं, बल्कि कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड फूड, बिस्कुट, केक, मिठाइयों और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से भी बड़ी मात्रा में चीनी का सेवन कर रहे हैं।
गुड़ और मिश्री क्या बेहतर विकल्प हैं?
पोषण विशेषज्ञों के अनुसार गुड़ और मिश्री में कुछ सूक्ष्म पोषक तत्व हो सकते हैं, लेकिन ये भी अंततः शर्करा ही हैं। इसलिए इन्हें भी सीमित मात्रा में ही सेवन करना चाहिए। केवल चीनी की जगह गुड़ लेने से मधुमेह या मोटापे का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं होता।
क्या करें?
– कोल्ड ड्रिंक और मीठे पेय कम करें।
– पैकेज्ड खाद्य पदार्थों के लेबल पढ़ें।
– चाय-कॉफी में चीनी कम करें।
– ताजे फल खाएं, जूस की जगह पूरा फल लें।
– बच्चों में मीठे स्नैक्स की आदत कम करें।
निष्कर्ष
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में चीनी सेवन को लेकर और सख्त स्वास्थ्य नीतियां देखने को मिल सकती हैं। यदि लोग अभी से अतिरिक्त चीनी कम करना शुरू कर दें तो मधुमेह, मोटापा और हृदय रोग जैसी बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।





