नई दिल्ली। आधुनिक जीवनशैली, मोबाइल फोन के बढ़ते उपयोग और काम के दबाव के कारण बड़ी संख्या में लोग पर्याप्त नींद नहीं ले पा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार 7 घंटे से कम नींद लेना शरीर और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार नींद के दौरान शरीर स्वयं की मरम्मत करता है। पर्याप्त नींद न मिलने पर थकान, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी और कार्यक्षमता पर असर पड़ सकता है। लंबे समय तक नींद की कमी कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को भी बढ़ा सकती है।
नींद की कमी से जुड़े संभावित जोखिम
- उच्च रक्तचाप
- हृदय रोगों का बढ़ा खतरा
- मोटापा
- टाइप-2 मधुमेह
- कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली
- तनाव और चिंता
- याददाश्त पर प्रभाव
विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश वयस्कों के लिए प्रतिदिन 7 से 9 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद आवश्यक मानी जाती है। केवल बिस्तर पर समय बिताना पर्याप्त नहीं है, बल्कि गहरी और बाधारहित नींद भी महत्वपूर्ण है।
अच्छी नींद के लिए अपनाएं ये आदतें
- रोज एक ही समय पर सोएं और जागें।
- सोने से पहले मोबाइल और लैपटॉप का उपयोग कम करें।
- शाम के समय अधिक चाय, कॉफी और कैफीन युक्त पेय से बचें।
- सोने का कमरा शांत और आरामदायक रखें।
- नियमित व्यायाम करें, लेकिन सोने से ठीक पहले नहीं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अच्छी नींद स्वस्थ जीवनशैली का उतना ही महत्वपूर्ण हिस्सा है जितना संतुलित आहार और नियमित व्यायाम। पर्याप्त नींद शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाए रखने में मदद करती है।
नोट: यह समाचार केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। यह चिकित्सकीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय से पहले योग्य चिकित्सक से परामर्श लें। इस सामग्री का उपयोग किसी न्यायालय, कानूनी कार्यवाही या चिकित्सकीय प्रमाण के रूप में नहीं किया जा सकता।





