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आयातित दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने की तैयारी, केंद्र ने दवा आयात नियमों में बदलाव का रखा प्रस्ताव

नई व्यवस्था लागू होने पर मरीजों तक पर्याप्त उपयोग अवधि वाली दवाएं पहुंचाने और सप्लाई चेन को मजबूत करने में मिलेगी मदद।

नई दिल्ली | 26 जून 2026

देश में आवश्यक दवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने आयातित दवाओं से जुड़े नियमों में संशोधन का मसौदा जारी किया है। प्रस्ताव के अनुसार, भारत में आयात होने वाली दवाओं के पास आयात के समय कम से कम 12 महीने की शेष शेल्फ लाइफ होना आवश्यक होगा। वर्तमान में आयातित दवाओं के लिए कुल शेल्फ लाइफ का 60 प्रतिशत शेष होना अनिवार्य है।

स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य मरीजों तक पर्याप्त उपयोग अवधि वाली गुणवत्तापूर्ण दवाएं पहुंचाना है। इससे दवाओं के वितरण, भंडारण और उपयोग के लिए अधिक समय मिलेगा, साथ ही सप्लाई चेन की कार्यक्षमता में भी सुधार होने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने से आवश्यक दवाओं की उपलब्धता बेहतर हो सकती है और समय से पहले दवाओं के अनुपयोगी होने की समस्या भी कम होगी। इससे दवा आपूर्ति प्रबंधन अधिक प्रभावी बनने के साथ अनावश्यक बर्बादी में कमी आने की संभावना है। हालांकि, बायोलॉजिकल दवाओं और रेडियोफार्मास्यूटिकल्स के लिए वर्तमान नियम यथावत रखने का प्रस्ताव है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस मसौदे पर उद्योग, विशेषज्ञों और आम नागरिकों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम नियम अधिसूचित किए जाएंगे। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह प्रस्ताव केवल आयात के समय शेष शेल्फ लाइफ से संबंधित है और दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा या प्रभावशीलता के मौजूदा मानकों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

अस्वीकरण:

यह समाचार केवल जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय से पहले चिकित्सकीय सलाह अवश्य लें।

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