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BHU का नया शोध: भूलने की बीमारी के शुरुआती चरण में आयुर्वेदिक उपचार पर दुनिया का पहला व्यक्तिगत क्लिनिकल ट्रायल

14 महीने तक चले अध्ययन में मरीज की स्मृति, दैनिक कार्यक्षमता और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार के संकेत मिले, विशेषज्ञों ने फिर भी चिकित्सकीय सलाह के बिना दवा न लेने की अपील की।

वाराणसी | 27 जून 2026

भूलने की बीमारी के शुरुआती चरण (Mild Cognitive Impairment – MCI) के उपचार को लेकर भारत से एक महत्वपूर्ण शोध सामने आया है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के चिकित्सक-वैज्ञानिकों ने आयुर्वेद आधारित दुनिया का पहला प्रकाशित “N-of-1 Clinical Trial” पूरा किया है। इस प्रकार के अध्ययन में एक ही मरीज पर लंबे समय तक उपचार का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाता है, ताकि उसकी व्यक्तिगत प्रतिक्रिया को विस्तार से समझा जा सके।

यह अध्ययन लगभग 14 महीनों तक चला, जिसमें आयुर्वेद की पारंपरिक औषधि कल्याणक घृत (Kalyanaka Ghrita) का उपयोग एक ऐसे मरीज पर किया गया, जिसे भूलने की बीमारी के शुरुआती लक्षण थे। शोध के दौरान मरीज की स्मरण शक्ति, संज्ञानात्मक क्षमता (Cognitive Function), दैनिक कार्य करने की क्षमता और मानसिक स्वास्थ्य में सकारात्मक सुधार के संकेत दर्ज किए गए।

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अध्ययन आयुर्वेद में व्यक्तिगत (Personalized) उपचार की वैज्ञानिक संभावनाओं को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह केवल एक मरीज पर किया गया अध्ययन है। इसलिए इसे सभी मरीजों पर समान रूप से प्रभावी उपचार नहीं माना जा सकता और व्यापक निष्कर्षों के लिए बड़े स्तर पर और शोध की आवश्यकता होगी।

विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी आयुर्वेदिक या अन्य दवा का सेवन स्वयं न करें। भूलने की समस्या या मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े लक्षण दिखाई देने पर योग्य चिकित्सक या आयुर्वेद विशेषज्ञ से परामर्श लेना आवश्यक है।

मुख्य बिंदु

  • BHU ने आयुर्वेद का दुनिया का पहला प्रकाशित N-of-1 Clinical Trial किया।
  • अध्ययन भूलने की बीमारी के शुरुआती चरण (MCI) वाले एक मरीज पर किया गया।
  • 14 महीने तक मरीज का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया गया।
  • स्मृति और संज्ञानात्मक क्षमता में सुधार के संकेत मिले।
  • विशेषज्ञों ने बिना चिकित्सकीय सलाह दवा न लेने की सलाह दी।

अस्वीकरण

यह समाचार केवल सूचना एवं जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। किसी भी आयुर्वेदिक या अन्य दवा का उपयोग योग्य चिकित्सक या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह के बिना न करें।

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