Health Tips | 12 जुलाई 2026
बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन इस दौरान पेट और पाचन से जुड़ी परेशानियों का खतरा भी बढ़ सकता है। दूषित भोजन या पानी से दस्त जैसी बीमारियां फैल सकती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, डायरिया में सबसे बड़ा खतरा शरीर से पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी यानी डिहाइड्रेशन का होता है।
मानसून के दौरान भोजन और पानी की स्वच्छता को लेकर की गई छोटी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। पेट दर्द, उल्टी, दस्त और मतली जैसे लक्षण कई तरह के food-borne या gastrointestinal infections में दिखाई दे सकते हैं। इसलिए केवल दवा लेना ही नहीं, बल्कि बीमारी के संभावित कारणों और रोजमर्रा की आदतों पर ध्यान देना भी जरूरी है।
1. लंबे समय तक बाहर रखा भोजन खाना
बारिश के मौसम में खुले या असुरक्षित तरीके से रखे भोजन को खाने से संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। पूरी तरह पका और गर्म परोसा गया भोजन अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है। यदि भोजन की गुणवत्ता या उसके सुरक्षित भंडारण को लेकर संदेह हो, तो उसे खाने से बचना बेहतर है।
2. पानी की सुरक्षा को नजरअंदाज करना
दूषित पानी दस्त फैलाने वाले संक्रमणों का माध्यम बन सकता है। पीने, खाना बनाने और बर्फ तैयार करने के लिए सुरक्षित पानी का इस्तेमाल जरूरी है। जहां पानी की सुरक्षा को लेकर संदेह हो, वहां स्थानीय स्वास्थ्य निर्देशों का पालन करना और जरूरत के अनुसार पानी को उबालकर या उचित तरीके से disinfect करके इस्तेमाल करना चाहिए।
3. कटे हुए फल और असुरक्षित भोजन खाना
पहले से कटे हुए फल या ठीक तरह से सुरक्षित न रखा गया भोजन संक्रमण का जोखिम बढ़ा सकता है। खासकर ऐसे भोजन से सावधान रहना चाहिए जिसकी refrigeration या handling के बारे में जानकारी न हो। ताजा तैयार और अच्छी तरह पका भोजन बेहतर विकल्प हो सकता है।
4. खाना खाने से पहले हाथ न धोना
हाथों की सफाई पेट से जुड़ी कई बीमारियों से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। WHO साबुन से हाथ धोने को खास तौर पर शौचालय इस्तेमाल करने के बाद और भोजन तैयार करने से पहले महत्वपूर्ण मानता है। CDC के अनुसार, हाथ धोने से डायरिया से जुड़ी बीमारियों के एक हिस्से को रोका जा सकता है।
5. उल्टी-दस्त में पानी की कमी को हल्के में लेना
लगातार दस्त या उल्टी से शरीर पानी और जरूरी लवण खो सकता है। WHO के अनुसार, डायरिया में डिहाइड्रेशन सबसे गंभीर खतरों में से एक है। ऐसी स्थिति में तरल की कमी पूरी करना महत्वपूर्ण है और जरूरत के अनुसार ORS का इस्तेमाल किया जाता है।
शरीर में पानी की कमी के इन संकेतों को न करें नजरअंदाज
बहुत कम पेशाब आना, पेशाब का रंग बहुत गहरा होना, अत्यधिक प्यास, मुंह या गला सूखना और चक्कर आना डिहाइड्रेशन के संकेत हो सकते हैं। छोटे बच्चों में पानी की कमी तेजी से हो सकती है, इसलिए उनमें विशेष सावधानी जरूरी है।
यदि दस्त गंभीर हो, मल में खून आए, तेज बुखार हो, बहुत ज्यादा पेट दर्द हो या डिहाइड्रेशन के संकेत दिखाई दें तो चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
निष्कर्ष
बारिश में पेट की गड़बड़ी को केवल मौसम की सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। सुरक्षित पानी, साफ हाथ और सुरक्षित तरीके से तैयार भोजन संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं। उल्टी या दस्त की स्थिति में शरीर में पानी की कमी पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।




